
कह कर निकल जाना हमेशा मुश्किल रहा मेरे लिए
रिश्ते नाते को गणित के सवालों की तरह कभी नहीं सुलझाया मैने
दूसरों के लिए हमेशा ज्यादा संभावनाएं छोड़ी
चुप रहा क्योंकि ठेस पहुंचाने से डरता था
झेलता रहा ताकि दूसरे की उम्मीद टूटने ना पाए
खुद को नासमझ मानकर दूसरों को समझने की कोशिश करता रहा
हर गलती पर कटघरे में खुद को खड़ा किया
बार बार जज बनकर खुद को मुजरिम साबित किया
भूल गया गणित के उन सारे फार्मूलों को
जिनसे खुद की जिंदगी के कठिन से कठिन सवाल हल होते हैं
अब अक्सर खामोश रहता हूं
कुछ बोलने की ताकत नहीं बची है मुझमें
सपने मुश्किल इंतहान से हो गए हैं
शतरंज के खेल सी जिंदगी को शह मिल चुकी है
मात से बचने का कोई फार्मूला नहीं है मेरे पास
रिश्ते नाते को गणित के सवालों की तरह कभी नहीं सुलझाया मैने
दूसरों के लिए हमेशा ज्यादा संभावनाएं छोड़ी
चुप रहा क्योंकि ठेस पहुंचाने से डरता था
झेलता रहा ताकि दूसरे की उम्मीद टूटने ना पाए
खुद को नासमझ मानकर दूसरों को समझने की कोशिश करता रहा
हर गलती पर कटघरे में खुद को खड़ा किया
बार बार जज बनकर खुद को मुजरिम साबित किया
भूल गया गणित के उन सारे फार्मूलों को
जिनसे खुद की जिंदगी के कठिन से कठिन सवाल हल होते हैं
अब अक्सर खामोश रहता हूं
कुछ बोलने की ताकत नहीं बची है मुझमें
सपने मुश्किल इंतहान से हो गए हैं
शतरंज के खेल सी जिंदगी को शह मिल चुकी है
मात से बचने का कोई फार्मूला नहीं है मेरे पास






